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श्री दिनेश वी. गणवीर ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के 55वें महानिदेशक के रूप में पदभार संभाला; खनिज सुरक्षा, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और तकनीकी उन्नति पर ध्यान केंद्रित करने की प्रतिबद्धता दोहराई

श्री दिनेश विठ्ठलराव गणवीर ने खान मंत्रालय, भारत सरकार के अधीनस्थ कार्यालय भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के 55वें महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया है। भूवैज्ञानिक जांच, खनिज अन्वेषण, इंजीनियरिंग भूविज्ञान और संस्थागत नेतृत्व के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक के अनुभव के साथ श्री दिनेश वी. गणवीर इस पद पर व्यापक वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक अनुभव लेकर आए हैं। श्री दिनेश वी. गणवीर ने

A woman waits while checking her phone beside a laptop at a home desk. · एआई से निर्मित सांकेतिक दृश्य
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मूल स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB) — भारत सरकारमूल खबर पढ़ें ↗

श्री दिनेश विठ्ठलराव गणवीर ने खान मंत्रालय, भारत सरकार के अधीनस्थ कार्यालय भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के 55वें महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया है। भूवैज्ञानिक जांच, खनिज अन्वेषण, इंजीनियरिंग भूविज्ञान और संस्थागत नेतृत्व के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक के अनुभव के साथ श्री दिनेश वी. गणवीर इस पद पर व्यापक वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक अनुभव लेकर आए हैं।

श्री दिनेश वी. गणवीर ने आरटीएमएनयू विश्वविद्यालय, नागपुर से भूविज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री पूरी करने के बाद 1 जुलाई 1994 को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण में कार्यभार ग्रहण किया। 32 वर्षों से अधिक के अपने सेवाकाल में उन्होंने जीएसआई के मध्य क्षेत्र, पूर्वोत्तर क्षेत्र और उत्तरी क्षेत्र में विभिन्न वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर कार्य किया है। महानिदेशक का पदभार संभालने से ठीक पहले वे नागपुर स्थित मध्य क्षेत्र में अपर महानिदेशक और विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे। इसके साथ ही वे राष्ट्रीय मिशन प्रमुख-II का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे।

उनके योगदान में भूवैज्ञानिक मानचित्रण, खनिज अन्वेषण, इंजीनियरिंग भूविज्ञान और बहुविषयक भू-विज्ञान संबंधी अध्ययन शामिल हैं। उनके प्रमुख कार्यों में पश्चिमी बस्तर क्रेटन में विषयगत मानचित्रण; महाराष्ट्र के साकोली फोल्ड बेल्ट में सोने और हीरे का अन्वेषण; तथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों भीमबेटका शैलाश्रयों और एलोरा गुफाओं के संरक्षण से जुड़े भूवैज्ञानिक अध्ययन शामिल हैं। उन्होंने भारत-पेरू संयुक्त कार्य समूह, रूस-भारत खनन उप-समूह और ऑस्ट्रेलिया में आईएमएआरसी 2022 सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जीएसआई का प्रतिनिधित्व किया है।

नेतृत्व संबंधी दायित्वों में, विशेष रूप से राष्ट्रीय मिशन प्रमुख-II के रूप में, श्री दिनेश वी. गणवीर बहुविषयक क्षेत्रीय कार्यक्रमों और देशव्यापी खनिज अन्वेषण की योजना बनाने तथा निगरानी से जुड़े रहे। हाल के समय में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के लिए अन्वेषण संबंधी जांच में पांच गुना वृद्धि करने तथा जीएसआई के राष्ट्रीय दायित्व के अनुरूप खनिज नीलामी प्रक्रिया के लिए भूवैज्ञानिक रिपोर्ट और अन्वेषण ब्लॉक तैयार करने में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई। इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश के खनिज अन्वेषण और संसाधन विकास संबंधी पहलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके तहत 359 भूवैज्ञानिक रिपोर्ट और 377 भूवैज्ञानिक ज्ञापन सौंपे गए। इनमें से 202 ब्लॉक महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित थे, जिनमें से 40 की सफलतापूर्वक नीलामी की जा चुकी है। वहीं, अन्वेषण लाइसेंस (ईएल) व्यवस्था के तहत 56 ब्लॉक सौंपे गए, जिनमें से 11 की नीलामी चरण-I और चरण-II के अंतर्गत की जा चुकी है।

महानिदेशक का पदभार ग्रहण करने के बाद श्री दिनेश वी. गणवीर ने जीएसआई के कार्यों में वैज्ञानिक गहराई, प्रासंगिकता और राष्ट्रीय प्रभाव बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में एकीकृत भू-विज्ञान संबंधी जांच, उन्नत खनिज संभाव्यता मानचित्रण और वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़ तथा नीलामी के लिए तैयार खनिज ब्लॉकों की व्यवस्थित पहचान के माध्यम से महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के अन्वेषण में तेजी लाना शामिल होगा। ये प्रयास खनिज सुरक्षा को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने के देश के उद्देश्यों में सहायक होंगे।

उन्होंने कठोर क्षेत्र-आधारित जांच के साथ उभरती प्रौद्योगिकियों और उन्नत डेटा विश्लेषण का उपयोग करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। आधुनिक भू-विज्ञान संबंधी उपकरणों और विधियों के एकीकरण से अन्वेषण की सटीकता और दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है। प्रयोगशाला अवसंरचना को मजबूत करना, विश्लेषणात्मक क्षमताओं का उन्नयन और अपतटीय अन्वेषण भी उनके प्रमुख कार्यक्षेत्र होंगे।

खनिज अन्वेषण के अलावा, जीएसआई बुनियादी भू-विज्ञान संबंधी अनुसंधान, भूस्खलन की पूर्व चेतावनी, हिमनद और हिममंडल संबंधी अध्ययन, प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं तथा आपदा जोखिम आकलन में अपने योगदान को और मजबूत करना जारी रखेगा। ये कार्य सूचित नीति निर्माण, अवसंरचना नियोजन, आपदा तैयारी और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें देश की बदलती विकास संबंधी और सामाजिक प्राथमिकताओं को पूरा करने वाले विश्वसनीय तथा विज्ञान-आधारित इनपुट तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।

संस्थागत विकास पर जोर देते हुए श्री दिनेश वी. गणवीर ने वैज्ञानिक कर्मियों को सशक्त बनाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने, योग्यता और प्रदर्शन को मान्यता देने तथा राष्ट्रीय मिशनों, क्षेत्रीय कार्यालयों और राज्य इकाइयों के बीच समन्वय मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। जीएसआई की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए संसाधनों का कुशल उपयोग और उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक परिणामों की समयबद्ध उपलब्धता प्रमुख प्राथमिकताएं बनी रहेंगी।

उनके नेतृत्व में जीएसआई अपनी समृद्ध वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए तेजी से बदलते भू-विज्ञान और तकनीकी परिदृश्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करेगा। वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार, सहयोग और परिणामोन्मुखी कार्य पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए यह संगठन भारत के खनिज संसाधन आधार को मजबूत करने, अवसंरचना विकास में सहयोग देने, आपदाओं के प्रभावों से उबरने की क्षमता बढ़ाने और विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन में योगदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

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पीके/केसी/आरटी/एके


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